समान नागरिक संहिता लागू होने से देश मजबूत होगा

सर्व विदित है कि एक समान नागरिक संहिता लागू होने से देश मजबूत होगा। इस बात को समस्त देशवासियों को समझने की जरूरत है।

समान नागरिक संहिता लागू होने से देश मजबूत होगा

विजय केसरी: 

सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि अब तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं भी भारतीय प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। न्यायालय ने अपना मंतव्य दिया कि जाब्ता फौजदारी मामले में धर्म, संप्रदाय और जाति के आधार पर फैसला नहीं होने चाहिए। साथ ही संविधान की जो मूल भावना है कि समान नागरिक संहिता बनाई जानी चाहिए ।  अब उसका वक्त आ गया है।केंद्र में एनडीए की तीसरी बार सरकार बन गई। भाजपा ने तीनों  लोक सभा चुनाव के पूर्व जारी अपने घोषणा पत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात दर्ज की ।  इस घोषणा के दस वर्ष बीत गए।  समान नागरिक संहिता पर दोनों सदनों में सिर्फ चर्चा भर  ही हो पाई  । जबकि भाजपा सरकार के नेता गण केंद्र की सत्ता पर आने पर देश में समान नागरिक संहिता कानून लगने के लागू करने के बात तीनों लोकसभा चुनाव में जरूर करते नजर आए। तीसरी बार भी एनडीए गठबंधन की सरकार केंद्र में बन गई,  लेकिन सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता कानून लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। क्या समान नागरिक संहिता कानून सिर्फ घोषणा पत्र का ही अंग बनकर रह जाएगा ? सर्व विदित है कि एक समान नागरिक संहिता लागू होने से देश मजबूत होगा। इस बात को समस्त देशवासियों को समझने की जरूरत है। भारत में  निवास करने वाले एक बड़े वर्ग का मानना है कि आजादी के बाद ही देश में एक समान नागरिक कानून लागू हो जाना चाहिए था।  लेकिन आजादी के बाद की पहली सरकार  इस दिशा में कदम क्यों नहीं उठाई ?  विचारणीय है। यह एक  राजनीतिक भूल के समान है।  इस राजनीतिक भूल  की सजा हम सब वर्षों से भुगतते चले आ रहे हैं  ।  मेरी दृष्टि में अगर पूर्व की सरकारें  यह कदम उठा लेती, तब आज देश में  जाति,धर्म,पंथ, और  विचार के नाम पर  लोगों के बीच दीवारें खड़ी की जा रही हैं ,खड़ी नहीं हो पाती। समान नागरिक कानून के नाम पर देश के भीतर गलत भ्रम  फैलाया जा रहा है। यह कदापि देश हित में नहीं हो सकता है।  इस कानून के अस्तित्व में आने से किसी के अधिकारों  की कोई कटौती नहीं होगी। केंद्र की सरकार अगर समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में है ? तब इस कानून का एक मसौदा देश की जनता के सामने पेश करना चाहिए, ताकि इस संहिता पर आम सहमति बन सके।  इस  कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा एक मुस्लिम महिला के पक्ष में  भत्ता दिए जाने का जो फैसला दिया है, ऐसे फैसले का स्वागत होना चाहिए।
 भारत एक विशाल लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में अपनी पहचान विश्व भर  में  बनाने सफल रहा है।  भारत एक तेज गति से विकसित होने वाले देशों की श्रेणी में खुद को खड़ा करने में सफल रहा है।  भारत की अर्थव्यवस्था  विश्व की सबसे तेज गति से  बढ़ रही है।  यह समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है । भारत में विभिन्न धर्म,जाति, पंथ विचार के लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। भारत का संविधान समस्त नागरिकों को एक समान मौलिक अधिकार प्रदान करता है।  समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए वही नियम कानून है, जो देश के  सबसे शीर्ष पर बैठे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को प्राप्त है । भारत का संविधान किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता है।  भारत का संविधान धर्म, जाति, पंथ, विचार, ऊंच-नीच ,अमीर गरीब लोगों के लिए कोई भी अलग से विशेष  अधिकार नहीं  प्रदान नहीं करता है। भारत का संविधान भारत में निवास करने वाले समस्त नागरिकों को एक समान अधिकार प्रदान करता है,  चाहे वह किसी धर्म ,जाति , पंथ विचार  से जुड़ा हुआ क्यों न हो । यही भारत के संविधान की खूबसूरती है।
 डॉ भीमराव अंबेडकर संविधान सभा के सर्वसम्मति से ड्राफ्टिंग कमिटी के निर्वाचित अध्यक्ष थे । उन्होंने संविधान को हर एक भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों को ध्यान में रखकर बनाया।   संविधान सभा के सभी सम्मानित सदस्यों ने भारत के संविधान को सर्वग्राही और  सुसंगठित रखने में कोई भी कसर नहीं छोड़ा 
 इसका परिणाम यह हुआ कि भारतवासी आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी उसी मजबूती के साथ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
समान नागरिक कानून लागू के संबंध में देशभर में जो राजनीति की जा रही है, भारत की एकता और अखंडता को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है । यह किसी भी मायने में देश हित में नहीं है। विपक्ष, एनडीए सरकार पर बार-बार यह आरोप लगा रही है कि  भारत का संविधान बदल देगी। विपक्ष भारत का संविधान हाथ में लेकर 18 वीं लोकसभा का चुनाव लड़ी। विपक्ष के नेता गण जनता को यह बताने पर जोर देते रहें कि अगर एनडीए  फिर से केंद्र में आती है, तब भारत का संविधान बदल दिया जाएगा।  मेरा विपक्ष सीधा सवाल है कि भारत का संविधान कोई आम पुस्तक है ? जिसे आसानी से बदला जा सकता है ?  भारत का संविधान देश की आत्मा है । इस संविधान का निर्माण एक जनतांत्रिक प्रक्रिया से पूरा हुआ है। जिसे 26 जनवरी 1950 को भारत का लोकसभा में पारित किया। इसे कदापि बदला नहीं जा सकता है। विपक्ष जनता को गुमराह कर रही है। भारत का संविधान लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद आधारशिला पर खड़ा है । समान नागरिक कानून लागू होने से देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी । जब समस्त देशवासियों को उसके मौलिक अधिकारों के तहत ही एक समान मतदान देने का अधिकार प्राप्त है , ठीक उसी प्रकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के लागू होने से किसी के कोई भी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।  किसी भी धर्मावलंबियों  के पूजा पद्धतियों में किसी भी तरह के बदलाव नहीं हूं। इस कानून से  कोई भी नुकसान नहीं होने जा रहा है , बल्कि एक समान नागरिक कानून लागू होने से स्त्री -  पुरुष के अधिकारों की रक्षा होगी।।  समान नागरिक कानून किसी के धर्म ,आस्था और विचार के साथ छेड़छाड़ नहीं करता दिख रहा है।  समान नागरिक कानून सबों  को समान  अधिकार प्रदान करता है । विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहां इस तरह के कानून लागू है।  जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा आदि देशों में यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे कानून  है,  वहां के नागरिकों को एक समान नागरिक अधिकार प्राप्त है।  ये  देश ऐसे समान कानून के चलते   दिन ब दिन तरक्की करते चले जा रहे हैं।  विश्व के अन्य देशों की तुलना में यहां के लोगों के बीच अविश्वास कम है ।
  भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता ने  आने से पूर्व ही यूनिफॉर्म सिविल कोड अर्थात एक समान नागरिक संहिता कानून की बात कही थी।  एक समान नागरिक कानून लागू होने से हम सबों के मन में जो दूरियां व्याप्त है वाह दूर होगी । एक समान नागरिक कानून के नाम पर विपक्ष की  राजनीति दिन ब दिन चिंता का विषय बनती चली जा रही है।  विपक्षी एकता के नाम पर देश में  अल्पसंख्यकों को भड़काने की कोशिश की जा रही है । उनके मन मस्तिष्क में गलत तरह की बातें डाली जा रही है । मैं देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय से अपील करना चाहता हूं कि सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी  की  एक समान नागरिक संहिता कानून क्या है  ? इससे संबंधित लिटरेचर का अध्ययन करें।  यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है ? इसके अध्ययन से सारी बातें स्पष्ट हो जाएगी। एक समान नागरिक कानून लागू होने से किसी के भी धार्मिक, पूजा - पाठ इबादत व धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित नहीं होंगे बल्कि सबों  को एक समान नागरिक कानून प्राप्त होगा ।
विपक्षी पार्टियां वोट की राजनीति के तहत झूठा प्रचार कर रही हैं। ऐसे झूठे प्रचार से  देशवासियों को बचने की जरूरत है ।एक समान नागरिक कानून के प्रति लोगों में जो भय का वातावरण पैदा किया जा रहा है,किसी भी सूरत में देश हित में नहीं है ।एक समान नागरिक  कानून ,जो देश में निवास कर रहे, सभी के  धार्मिक, आदिवासी समुदायों पर उनके व्यक्तिगत मामले जैसे संपत्ति विवाद, विरासत गोद लेने आदि पर लागू होगा ।
एक समान नागरिक संहिता के संबंध में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रियों ने समय-समय पर जो बयान दिया है। उनके बयानों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है । एक समान नागरिक कानून आज के बदले परिदृश्य में समय की मांग बन गई है ।  भारत, विश्व की सबसे तेज गति से चलने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश बन चुका है।  भारत में विश्व की कई बड़ी-बड़ी कंपनियां उद्योग स्थापित करना चाह रही है।  जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।  वहीं दूसरी ओर बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा । भारत का संविधान के अध्ययन से प्रतीत होता है कि भारत का संविधान बिना किसी धर्म, पंथ,विचार के लोगों  के भेदभाव किए पूर्ण  स्वतंत्रता‌ के साथ मनाने का अधिकार प्रदान करता है।  साथ ही सबों  को एक समान नागरिक कानून प्रदान करता है।  भारत के संविधान में अलग से एक समान नागरिक कानून नहीं रहने के कारण समय-समय पर इसका नुकसान देशवासियों को ही भोगना पड़ जाता है । यह किसी भी सूरत में उचित नहीं है।  विपक्षी पार्टियों को देश हित को ध्यान में रखकर ही एक समान नागरिक कानून के संबंध में बयान जारी करना चाहिए।