शिव की उपासना अनंत काल से होती चली आ रही है

(15 फरवरी, फाल्गुन त्रयोदशी,महाशिवरात्रि पर विशेष)

शिव की उपासना अनंत काल से होती चली आ रही है

भगवान शिव की उपासना से मानवीय जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं । भगवान शिव ने संसार के सभी प्राणियों को एक सूत्र में बांधा है । उनका यह बंधन वासुदेव कुटुंबकम की सीख प्रदान करता है । संसार के सभी प्राणी एक पिता परमेश्वर की संतान है। 'एको अहं, द्वितीयो नास्ति, न भूतो न भविष्यति!' अर्थात् 'एक मैं ही हूँ दूसरा कोई नहीं। इसका अर्थ है, इस ब्रह्माण्ड मे एक ईश्वर ही है दूसरा और कोई नहीं। वही सर्व भूतों मे विद्यमान है। वही सर्वत्र रमा हुआ है। जितने भी स्वरूप दिखाई दे रहे हैं, सब मे उसकी सत्ता है।'जब ईश्वर एक हैं और हम सब उनके ही संतान हैं। तब क्यों अलग-अलग दिखाने और बताने की कोशिश करते हैं ?  ईश्वर कई रूपों में विभक्त हैं, लेकिन उनके मूल में शिव ही सर्वोच्च स्थान पर विराजमान है । ईश्वर ने हम सबों को एक ही माला में पिरोया है। हम सब आपस में किसी न किसी रूप से भाई - भाई हैं। शिव की उपासना रंग भेद, काले - गोरे, अमीर - गरीब, अगले - पिछड़े के भावों से मुक्त आत्मा की भक्ति होती है। शिव तत्व सभी में समान रूप से विराजमान है। मनुष्य को दुःखी कर, परेशान कर, विश्वासघात कर कोई भी जगत का प्राणी खुश नहीं रह सकता। दीन दुखियों की सेवा ही सच्चे अर्थों में शिव की सेवा है। शिवरात्रि के दिन शिव की उपासना अर्थात लोक कल्याण की मनोकामना । शिव की उपासना अनंत काल से होती चली आ रही है और अनंत काल तक होती रहेगी।

 फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाने वाला महा शिवरात्रि का पर्व  वैवाहिक संबंधों को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही इस संबंध की मजबूती की भी सीख प्रदान करता है । शिव अर्थात कल्याण । शिव का नाम स्मरण करने मात्र से एक असीम शांति की अनुभूति होती है । हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के निरंतर जाप से लोक और परलोक दोनों सुधारते हैं। आज की बदली परिस्थिति में जहां चंहुओर अशांति, घृणा व्याप्त है । इनसे मुक्ति का एक ही सर्वोत्तम उपाय है, शिव की उपासना । शिव जगत के सभी प्राणियों को जोड़ता है। 

शिव के विचार अर्थात शिव तत्व की स्वयं में अनुभूति है। शिव तत्व का मायने स्वयं में उल्लास व आनंद की अनुभूति है । शिव का मतलब सत्यम, शिवम, सुंदरम है। सत्य ही शिव है।  शिव ही सुंदर है। अर्थात स्वयं में सत्य की अनुभूति करना ही सत्यम, शिवम, सुंदर है। मनसा, कर्मना, वाचा से सत्य का पालन करना ही शिव तत्व की अनुभूति है।  शिव जगत  में हर जगह समान रूप से व्याप्त है। शिव तत्व, जड़ और चेतन दोनों में समान रूप से व्याप्त है । शिव को जागृत करना अर्थात स्वयं में शिव तत्व को स्थापित करना है । महाशिवरात्रि का पर्व  इसलिए मनाया जाता है कि स्वयं में शिव तत्व को स्थापित करना है। शिव पुराण के अनुसार आज के ही दिन जगतगुरु भगवान शिव और आदि शक्ति स्वरूपा पार्वती जी का विवाह संपन्न हुआ था । हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व के उपरांत सभी वैवाहिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाते हैं।  भगवान शिव, आदि शक्ति स्वरूपा को वरण कर यह बताना चाहते हैं किआदि शक्ति स्वरूपा को वरण करने की शक्ति सिर्फ उन में ही है। 

 आदि शक्ति स्वरूपा माता पार्वती ने भगवान  शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घनघोर तपस्या की थी। बर्षों जंगलों में एकांतवास की थी। सूखे पत्ते खाकर जीवित रही थी। माता पार्वती को इतनी घनघोर तपस्या करने के पश्चात भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए थे। आदि शक्ति स्वरूपा से पूर्व किसी ने भी ऐसी घनघोर तपस्या नहीं की थी। भगवान शिव  के साथ विवाह से पूर्व माता पार्वती ने यह घोषणा की थी कि चाहे मुझे जनमो - जन्म तक कुंवारी क्यों न रहना पड़े ! मैं जब भी विवाह करूंगी तो भगवान शिव से ही ।  उनकी यह बात सत्य साबित हुई।  आज के दिन जो भी लोग भगवान शिव और पार्वती की आराधना करते हैं।  उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।  विवाहित स्त्रियां महाशिवरात्रि का पर्व कर सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद भगवान शिव और पार्वती से प्राप्त करती हैं। जो भी कुंवारी कन्याएं  महाशिवरात्रि का पर्व करती हैं, उन्हें शीघ्र ही योग्य वर की प्राप्ति होती है । महाशिवरात्रि का दिन बहुत ही पवित्र और महत्व का दिन है।

 तंत्र विद्या के अनुसार आज की रात्रि जो भी तंत्र साधक भगवान शिव और पार्वती की आराधना सच्चे मन से करते हैं, उन्हें कई तरह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। भगवान शिव की आराधना सच्चे अर्थों में जगत कल्याण की आराधना के समान है । भगवान शिव उन भक्तों को बेहद पसंद करते हैं, जो दीन दुखियों की सेवा करते हैं। भगवान शिव जगत के सभी प्राणियों में समान रूप से विराजमान है।  मनुष्य अपने कर्म के अनुसार सुख और दुख को प्राप्त करते हैं।  भगवान शिव अपने सभी साधकों पर कृपा करते हैं।  भगवान शिव की उपासना शीघ्र फल दायिनी है। भगवान शिव बहुत जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं।सबकी मनोकामनाएं पूर्ण  कर देते हैं। भगवान शिव जगत का संहार इसलिए करते हैं, ताकि सृष्टि का फिर से  सृजन हो । सृष्टि का संहार और पालन के देव के रूप में भगवान शिव जाने जाते हैं ।

 परिवार का आधार स्तंभ वैवाहिक संबंध ही होते हैं। किसी भी परिवार की स्थापना पति - पत्नी के विवाह के बाद ही शुरू होती है । हर माता-पिता चाहते हैं कि अपने बच्चों की शादी योग्य लड़का एवं लड़की के साथ कर दें। यह दायित्व सामाजिक और पारिवारिक होता है।  इस दायित्व का निर्वहन परिवार के बड़े लोग करते हैं ।भारतीय संस्कृति व रीति रिवाज में विवाह को एक उल्लास , उमंग के उत्सव के रूप में देखा जाता है । जहां चंहुओर खुशियां ही खुशियां नजर आती हैं। महाशिवरात्रि का पर्व हम सबों को प्रसन्न रहने की भी सीख प्रदान करता है।   पति, पत्नी के बीच विश्वास और श्रद्धा ही विवाह संबंधों को मजबूती प्रदान करता है।  पति, पत्नी दोनों के बीच थोड़ा भी अविश्वास हो जाए तो वैवाहिक संबंधों में दरार पड़ जाते  हैं । महाशिवरात्रि का पर्व वैवाहिक संबंधों को आपसी विश्वास और निष्ठा के साथ जीवन जीने की सलाह प्रदान करता है । चूंकि पति-पत्नी ही परिवार के आधार स्तंभ होते हैं । अगर पति - पत्नी के बीच अच्छे संबंध नहीं होंगे तो आने वाली पीढ़ी पर इसका बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।  शादी - विवाह के संबंध के विषय में हमारे धर्म शास्त्रों का मत है कि यह सब पूर्व जन्मों का बंधन होता है । विधाता ही वैवाहिक संबंधों को तय करते हैं।  हम सब लड़का अथवा लड़की ढूंढने के लिए कहां-कहां नहीं जाते हैं, लेकिन जिनका, जिनसे विवाह लिखा होता है, उसी से होता है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि का पर्व वैवाहिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। पति पत्नी को मिलजुल कर रहने की सीख देता है।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी ने महाशिवरात्रि की महत्ता पर कहा कि महाशिवरात्रि शिव का दिन है| जहाँ भी सत्य है, उदारता है, सौन्दर्य है ; वहाँ निश्चित रूप से 'शिव' है। प्रकृति में कोई भी ऐसा स्थान नहीं, जहाँ शिव न हो| परन्तु शिव कोई व्यक्ति नहीं, अपितु समस्त सत्ता का ‘मूल’ है| शिव तत्व  सर्व विद्यमान है| शिव-तत्त्व ही जीवन का ‘सार’ है| महाशिवरात्रि का दिन, वास्तविकता में भीतर के "शिव-तत्त्व" की अनुभूति करने का दिन है| महाशिवरात्रि, असीम "शिव ऊर्जा" के भीतर ध्यान में डूबने और अनंत उत्सव मनाने का दिन है| वर्ष भर में, कुछ विशेष दिन समस्त मानव जाति के आध्यात्मिक और मानसिक विकास के लिए अति पवित्र माने जाते हैं| महाशिवरात्रि उन सभी शुभ अवसरों में विशेष है|