देश के शहीदों के नाम एक 'शहीद मेला' के आयोजन के मायने

देश के शहीदों के नाम एक 'शहीद मेला' के आयोजन के मायने

हजारीबाग जिले के इचाक पंचायत के बोधीबागी मैदान में देश के वीर शहीदों को समर्पित दस दिवसीय शहीद मेला का आयोजन अपने आप में एक अनूठा और देशवासियों के बीच देश भक्ति का अलख जगाने का एक सार्थक प्रयास है।‌ ऐसे देश के विभिन्न प्रांतो में शहीद मेले का आयोजन शहीदों की पुण्यतिथि और जन्मतिथि पर होते रहते हैं। इस तरह के मेलों के आयोजन से लोगों में राष्ट्र के प्रति समर्पण के भावना जागृत होती है। झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच ने हजारीबाग जिले में इस तरह की पहल कर  झारखंड वासियों को गौरांवित कर दिया है । इस शहीद मेला  की चर्चा संपूर्ण देश में हो रही है। ‌यह शहीद मेला झारखंड प्रांत का पहला शहीद  मेला कहा जा सकता है । ‌यह शहीद मेला पूरी तरह शहीदों के नाम समर्पित है । इस शहीद मेले की खासियत यह है कि  इस मेले में समाज के सभी वर्ग के लोग सम्मिलित होंगे । यह मेले को राजनीति से बिल्कुल दूर रखा गया है। यह पूरी तरह एक गैर राजनीतिक सामाजिक आयोजन है। इस दस दिवसीय शहीद मेला में लोग अपने-अपने विचारों को रखेंगे।  इसके साथ ही इस मेला  में लोगों को यह भी जानकारी दी जाएगी कि झारखंड प्रांत के कौन-कौन से वीर शहीदों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति थी। 

  झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता एवं प्रदेश सचिव अजीम अंसारी ने इस शहीद मेला को एक बड़ा ही अच्छा स्वरूप प्रदान किया है । ‌मेला के माध्यम से झारखंड के वीर शहीदों को एक सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। मेला भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । हमारे पूर्वज हजारों वर्ष पूर्व से मेला का आयोजन करते रहे हैं। मेला के माध्यम से लोग एक दूसरे से परिचित होते रहे हैं। एक गांव वाले दूसरे गांव वाले को जान पाते हैं। लोग एक दूसरे की बोलचाल, रहन-सहन, रीति रिवाज को जान पाते हैं। इसके साथ ही व्यापार भी होता है, जिसका सबों को आर्थिक लाभ भी  प्राप्त होता है। भारत के विकास में इस तरह के मेलों  का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।  आज की बदली सामाजिक परिदृश्य में भी बड़े-बड़े शहरों में भव्य मेलों का आयोजन होता रहता है। इस तरह के मेलों के माध्यम से लोगों को बहुत नई नई बातों की जानकारी दी जाती है। लोग ऐसे मेलों में सम्मिलित होकर बहुत कुछ नया सीख पाते हैं । भारत सरकार किसानों में जागृति लाने के लिए किसान मेला का आयोजन करती रहती है। वहीं   देश के आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए व्यापार मेले का आयोजन किया जाता  है। देश के विज्ञान को विकसित करने के लिए विज्ञान मेले का आयोजन होता रहता है। 
  शहीद मेला के माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी जाएगी कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों की  चौकसी के कारण ही हम सब अपने-अपने घरों में सुरक्षित रह पा रहे हैं। देश की सीमा की सुरक्षा की संपूर्ण जवाबदेही देश के सैनिकों के जिम्मे  होती  है। हमारे देश के वीर सैनिक किसी भी परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए चौबीसों  घंटे तत्पर रहते हैं। देश के वीर सैनिक देश की सीमा की सुरक्षा के लिए  हंसते-हंसते अपने कुर्बानी दे देते हैं। देश के वीर सैनिकों की कुर्बानी पर सदा देशवासियों को नाज  रहेगा ।  देश की आजादी की लड़ाई हम सबों ने मिलजुल कर लड़ी थी। लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली थी । आज हम सबों को देश की रक्षा भी मिलजुल कर करने की जरूरत है। आज की बदली अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में सीमा की सुरक्षा किसी भी राष्ट्र के लिए बहुत जरूरी हो गया है ।  अगर सीमा की सुरक्षा में थोड़ी भी कमी अथवा लापरवाही हुई तो देश के भीतर घुसपैठिये घुसकर कुछ भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं । इस तरह की घटना देश की एकता और अखंडता  को प्रभावित कर सकती है। खास कर भारत जैसे संवेदनशील देश, जिसके  चीन, पाकिस्तान और  बांग्लादेश जैसे पड़ोसी हों। ‌भारत को अपनी सुरक्षा के प्रति सदा चौकस  रहने की जरूरत है। जब-जब देश की सुरक्षा की बात आई, तब तब हमारे वीर सैनिकों  ने अपने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। शहीद मेला में शहीदों की शहादत,देश की सुरक्षा और वीर सैनिकों के  योगदान की जानकारी दी जाएगी। 
  अमर शहीद क्रांतिकारी अशफाक उल्लाह खान की ये पंक्तियां हमेशा देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी। 'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा' । हजारीबाग के इस गांव को प्रेरित करती हैं।  देश की आजादी के बाद से अब तक हजारीबाग जिले से सैकड़ो की संख्या में वीर शहीदों ने अपने-अपने प्राणों की आहुति दी । यह हजारीबाग जिले का सौभाग्य है कि इस धरती ने सीमा के प्रहरियों को जन्म देकर इस धरती को गौरान्वित किया है । आज उसी पवित्र भूमि पर शहीदों के सम्मान में मेला का आयोजन किया गया है, ये शहीद अपने-अपने बचपन बीताए। इसी माटी में खेले थे। इसी  माटी से उत्पन्न  अनाज खाएं थे। दस दिवसीय मेले का मुख्य उद्देश्य गांव के लोगों को अपने शहीद के बारे में बताना और उनके परिवार वालों को सम्मान प्रदान करना है। यह बताना है कि पूरा देश शाहिद के परिवार जनों का आभारी है।  शहीद मेला में देश के वैसे सपूत जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान देश की रक्षा के लिए दिए हैं, उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। कारगिल शहीद रघुवीर प्रसाद मेहता के स्मारक पर दर्जनों शाहिद के तस्वीर लगे हुए हैं।‌ इन तस्वीरों के माध्यम से यह  बताया जा रहा है कि इन योद्धा के कारण हमारा देश सुरक्षित है।
  इचाक के रहने वाले वीर शहीद रघुवीर प्रसाद मेहता, जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपना जीवन देश के नाम न्योछावर कर दिया, उनके आदम कद प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ ही इस मेला की शुरुआत होती है।  साथ ही इचाक के रहने वाले देश की सरहद की रक्षा करते हुए शहीद राजेश मिंज ने अपना बलिदाना दिया था। इन दोनों को मेला में श्रद्धांजलि दी जाती है। इस कार्यक्रम में देश के कई वीर सपूतों के तस्वीरें लगाई जाती हैं जिन्होंने अपना जीवन देश के लिए न्योछावर कर दिया था।  ईसाई की धरती से दर्जनों स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों को खुली चुनौती दी थी। दूसरी ओर कई जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन होना पूरे देश को संदेश देता है कि हर एक गांव में इस तरह का कार्यक्रम होना चाहिए। शहीद मेला के जरिए समाज के लोगों को वीर शहीदों के बलिदान को याद करता है।